प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) विद्यार्थियों के लिए

विद्यार्थियों के लिए बेस्ट प्रेरणादायक और मजेदार प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) 2023

विद्यार्थियों के लिए बेस्ट प्रेरणादायक और मजेदार प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) 2023

Prerak Prasang: किसी भी मनुष्य के लिए प्रेरणा बहुत ही जरूरी होती है, प्रेरणा से आप एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं। यदि आपके पास सही प्रेरणा है तो, वह आपको जीवन में आगे बढ़ने मैं मदद करती है। सफल व्यक्ति और उनके जीवन में कोई ना कोई प्रेरणा अवश्य रही होगी, जिससे कि वह एक सफलता के शिखर तक पहुंच पाने में सफल होता है।

प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) विद्यार्थियों के लिए

प्रेरक प्रसंग (Prerak Prasang) विद्यार्थियों के लिए

उसी तरह से प्रेरक कहानियां विमानों को कहां से कहां पहुंचा देती है। इसलिए विद्यार्थियों के जीवन में प्रेरक प्रसंग का होना आवश्यक होता है। आज हम आपको फिर एक प्रश्न और उस तरह की कहानियों का संग्रह बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और मोटिवेट होने में मदद मिलती है।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक प्रसंग क्यों आवश्यक है?

हम हम सभी जानते हैं कि, विद्यार्थी जीवन एक ऐसा समय होता है। जब बच्चा किसी भी रूप में डालने के लिए तैयार होता है। एक बच्चे का विद्यालय जीवन उसके जीवन की एक नियम होता है, जहां से उसके जीवन के अच्छे और बुरे समय की शुरुआत होती है।

विद्यार्थि शिक्षा के समय के दौरान में जो कुछ भी सीखता है, उसके साथ जीवन भर चलते हैं। इसी से बच्चों की नींव को कमजोर नहीं बल्कि उसे मजबूत बनाया जाता है। और इसी के साथ उन्हें प्रेरणादायक का प्रेरक प्रसंग और नैतिक मूल्यों को समझाया जाता है, नैतिक मूल्यों का विकास करना विद्यार्थी के जीवन में काफी जरूरी है और उसके लिए उन्हें प्रतिदिन अच्छे-अच्छे प्रेरक प्रसंग को सुनाना चाहिए, ताकि व नैतिकता और देश प्रेम के सांसद सामाजिक परोपकार की भावना भी उसके अंदर पनप सके। यदि आपका बच्चा है या विद्यार्थी प्रेरणादायक प्रेरक प्रसंग सुनता है या फिर पढता है और अपने जीवन में उसका अनुसरण करता है तो आगे चलकर किसी भी काम को करने से नहीं चूकते है।

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सबसे बेस्ट प्रेरक प्रसंग विद्यार्थियों के लिए

हृदय की इच्छाएं शांत नहीं होती हैं…. क्यों ?

एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी सम्राट ने उससे कहा,”जो भी चाहते हो, मांग लो।” दिवस के प्रथम याचक की कोई भी इच्छा पूरी करने का उसका नियम था। उस फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा,”बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें।”सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। वह तो जादुई था। जितनी अधिक मुद्राएं उसमें डाली गई, वह उतना ही अधिक खाली होता गया!
सम्राट को दुखी देख वह फकीर बोला,”न भर सकें तो वैसा कह दें। मैं खाली पात्र को ही लेकर चला जाऊंगा!
ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि लोग कहेंगे कि सम्राट अपना वचन पूरा नहीं कर सके ! ”सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, उसके पास जो कुछ भी था, सभी उस पात्र में डाल दिया गया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा, सो न भरा। तब उस सम्राट ने पूछा,”भिक्षु, तुम्हारा पात्र साधारण नहीं है। उसे भरना मेरी सामर्थ्य से बाहर है। क्या मैं पूछ सकता हूं कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है?” वह फकीर हंसने लगा और बोला,”कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है। क्या आपको ज्ञात नहीं है कि मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता? धन से, पद से, ज्ञान से- किसी से भी भरो, वह खाली ही रहेगा, क्योंकि इन चीजों से भरने के लिए वह बना ही नहीं है। इस सत्य को न जानने के कारण ही मनुष्य जितना पाता है, उतना ही दरिद्र होता जाता है।
इस प्रेरक प्रसंग से शिक्षा :-
हृदय की इच्छाएं कुछ भी पाकर शांत नहीं होती हैं, क्यों?
क्योंकि, हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है।”
शांति चाहिए ? संतृप्ति चाहिए ?

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तीन पुतले: लोक-कथा

महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामन्त्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे। महाराजा चन्द्र्गुप्त को खिलौनों का बहुत शौक था। उन्हें हर रोज़ एक नया खिलौना चाहिए था। आज भी महाराजा के पूछने पर कि क्या नया है; पता चला कि एक सौदागर आया है और कुछ नये खिलौने लाया है। सौदागर का ये दावा है कि महाराज या किसी ने भी आज तक ऐसे खिलौने न कभी देखें हैं और न कभी देखेंगे। सुन कर महाराज ने सौदागर को बुलाने की आज्ञा दी। सौदागर आया और प्रणाम करने के बाद अपनी पिटारी में से तीन पुतले निकाल कर महाराज के सामने रख दिए और कहा कि अन्नदाता ये तीनों पुतले अपने आप में बहुत विशेष हैं। देखने में भले एक जैसे लगते हैं मगर वास्तव में बहुत निराले हैं। पहले पुतले का मूल्य एक लाख मोहरें हैं, दूसरे का मूल्य एक हज़ार मोहरे हैं और तीसरे पुतले का मूल्य केवल एक मोहर है। सम्राट ने तीनों पुतलों को बड़े ध्यान से देखा। देखने में कोई अन्तर नहीं लगा, फिर मूल्य में इतना अन्तर क्यों? इस प्रश्न ने चन्द्रगुप्त को बहुत परेशान कर दिया। हार के उसने सभासदों को पुतले दिये और कहा कि इन में क्या अन्तर है मुझे बताओ। सभासदों ने तीनों पुतलों को घुमा फिराकर सब तरफ से देखा मगर किसी को भी इस गुत्थी को सुलझाने का जवाब नहीं मिला। चन्द्रगुप्त ने जब देखा कि सभी चुप हैं तो उस ने वही प्रश्न अपने गुरू और महामन्त्री चाणक्य से पूछा। चाणक्य ने पुतलों को बहुत ध्यान से देखा और दरबान को तीन तिनके लाने की आज्ञा दी। तिनके आने पर चाणक्य ने पहले पुतले के कान में तिनका डाला। सब ने देखा कि तिनका सीधा पेट में चला गया, थोड़ी देर बाद पुतले के होंठ हिले और फिर बन्द हो गए।

अब चाणक्य ने अगला तिनका दूसरे पुतले के कान में डाला। इस बार सब ने देखा कि तिनका दूसरे कान से बाहर आगया और पुतला ज्यों का त्यों रहा। ये देख कर सभी की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि आगे क्या होगा। अब चाणक्य ने तिनका तीसरे पुतले के कान में डाला। सब ने देखा कि तिनका पुतले के मुँह से बाहर आगया है और पुतले का मुँह एक दम खुल गया। पुतला बराबर हिल रहा है जैसे कुछ कहना चाहता हो। चन्द्रगुप्त के पूछ्ने पर कि ये सब क्या है और इन पुतलों का मूल्य अलग अलग क्यों है, चाणक्य ने उत्तर दिया। राजन, चरित्रवान सदा सुनी सुनाई बातों को अपने तक ही रखते हैं और उनकी पुष्टी करने के बाद ही अपना मुँह खोलते हैं।

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यही उनकी महानता है। पहले पुतले से हमें यही ज्ञान मिलता है और यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य एक लाख मोहरें है। कुछ लोग सदा अपने में ही मग्न रहते हैं। हर बात को अनसुना कर देते हैं। उन्हें अपनी वाह-वाह की कोई इच्छा नहीं होती। ऐसे लोग कभी किसी को हानि नहीं पहुँचाते। दूसरे पुतले से हमें यही ज्ञान मिलता है और यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य एक हज़ार मोहरें है। कुछ लोग कान के कच्चे और पेट के हलके होते हैं। कोई भी बात सुनी नहीं कि सारी दुनिया में शोर मचा दिया। इन्हें झूठ सच का कोई ज्ञान नहीं, बस मुँह खोलने से मतलब है। यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य केवल एक मोहर है।

Best Student प्रेरक प्रसंग

अपने आनेवाले कल का अनुमान लगाने का सबसे अच्छा तरीका, उसे आज ही निर्माण करना है।

हमेशा प्रश्न पूछना, एक विद्यार्थी के सबसे अच्छे और जरूरी गुणों में से एक हैं।

जब तक आप जो प्राप्त करना चाहते है, उसे पाने के लिए उसके पीछे नहीं पड़ जाते तब तक अब उसे प्राप्त नहीं कर सकते। अगर आप प्रश्न नहीं पूछते तो उत्तर हमेशा ‘नहीं’ ही होगा। अगर आप अपने कदम आगे नहीं बढ़ाते तो, आप जहां है वही हमेशा रहिएगा। इसलिए हमेशा आगे बढ़ते रहिए।

अंतिम शब्द

दोस्तों आपके सामने कई तरह के प्रेरक प्रसंग आपको और प्रेरक का कहानियों के बारे में बताया है, जिससे आप अपने जीवन में एक अद्भुत प्रेरणा है, प्राप्त कर सकते हैं। उतनी प्रेरणा के साथ आप आगे बढ़ सकते हैं। वहीं विद्यार्थियों के जीवन में भी इस तरह की प्रेरक प्रसंग को पढ़ना चाहिए। यह उन्हें सुनना आवश्यक होता है, ताकि वह जीवन में कठिनाइयों से जूझ सके और सफलता पाने के लिए उसे हमेशा प्रेरणा मिल सके। प्रेरक प्रसंग आपके जीवन में नया उत्साह लाते हैं। इसके साथ ही आप का मनोबल बढ़ाने में भी काफी कामयाबी दिलाते हैं।

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