भृगु संहिता का इतिहास

भृगु संहिता फलित ज्योतिष Bhrigu Sanghita | Bhrigu Samhita Astrology Hindi PDF

भृगु संहिता फलित ज्योतिष Bhrigu Sanghita | Bhrigu Samhita Astrology Hindi PDF

Bhrigu Sanghita : भृगु संहिता के बारे में आपने कई बार सुना होगा, आपको बता देगी यह है कि साधना जिसके माध्यम से आप ज्योतिष से संबंधित सारी जानकारी और अपने यहां पर प्राप्त कर सकते हैं। इस संहिता में कुंडली के लग्न के अनुसार बताया जाता है कि, व्यक्ति का भाग्य उदय कब होगा वहीं कई जन्मों का राज भी खोलती है। भृगु संहिता के माध्यम से अगर आपको अपने पिछले कई जन्मों के बारे में जानना है तो, इस ग्रन्थ को पढ़कर आप उसके बारे में जान सकते हैं।

भृगु संहिता का इतिहास

भृगु संहिता का इतिहास

आज के समय में कई लोग ज्योतिष शास्त्र का उपयोग करके अपने बारे में जानना चाहते हैं। इसका उपयोग 5000 साल से किया जा रहा है, इसे मानने वाले देश की लिस्ट काफी लम्बी है, जो इस ग्रन्थ को मानते है। भृगु संहिताका उपयोग करके अपने राजनीतिक से लेकर फिल्म करियर तक के बारे में जानना चाहते हैं।

आज तकनीक का दौर है और टेक्नोलॉजी काफी सारी आ चुकी है, लेकिन उसके बावजूद भी ज्योतिषियों द्वारा इंटरनेट पर ब्रह्म संहिता के माध्यम से व्यक्ति के भविष्य की जानकारी बताई जाती है। यह एक धार्मिक ग्रंथ है, जिसे ऋषि भृगु ने लिखा था। इस ग्रंथ को आज भी एक स्टोर रूम में भी आज भी रखा गया है, वह कहीं टन वजनी है उपलब्ध प्रश्नों के लिए एक सूचकांक तैयार किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित इससे को देखा जा सके।

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भृगु संहिता की विशेषता

जब कोई व्यक्ति भृगु शास्त्री को अपना नाम, जन्म तिथि, माता-पिता का नाम जैसी जानकारियां देता है, उसके बाद भृगु संहिता में उससे संबंधित जानकारियां ढूंढी जाती हैं। इसके बाद इसमें उसका नाम मिल जाता है, तो व्यक्ति को बुलाया जाता है और उसे उसका अतीत और भविष्य बताया जाता है। बताया जाता है, कि भाग्य या किस्मत का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। सुख-दुख, सफलता-असफलता, अमीरी-गरीबी सभी को अक्सर भाग्य से जोड़कर देखा जाता है।

हालांकि शास्त्र कहते हैं कि भाग्य बड़ा प्रबल है, मगर पुरुषार्थ द्वारा भाग्य को भी बदला जा सकता है। भृगु संहिता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें ज्योतिष संबंधी समस्त जानकारियां दी गई हैं। इसकी रचना ऋषि भृगु ने की थी। इसमें कुंडली के लग्न के अनुसार बताया गया है कि व्यक्ति का भाग्योदय कब होगा।

भृगु संहिता के अनुसार व्यक्ति के जीवन पर उसके भाग्य और किस्मत का भी काफी प्रभाव माना जाता है, जिसकी बदौलत वह सुख शांति और जीवन में सफलता प्राप्त करता है। वही अमीरी गरीबी आदि सब का संबंध उसके भाग्य से जुड़ा होता है। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को जो कुछ भी मिलता है उसके पास पहले से ही होता है और उसे भाग्य के कारण ही प्राप्त होता है। परंतु यदि व्यक्ति पुरुषार्थ करें तो उसके द्वारा उसका भाग्य भी बदला जा सकता है, हिंदू ज्योतिष शास्त्र साहित्य ग्रंथ इसके माध्यम से व्यक्ति के भाग्य से संबंधित कई बातें बताई जाती है।

भृगु पद्धति क्या होती है?

भृगु पद्धति में मुख्य रूप से तीन प्रकार से जातक को भविष्यफल दिया जाता है, इसमें आपको पहला जातक के नाम और जन्मकुंडली के ग्रहों की ‌स्‍थ‌ित‌ि के आधार पर उसका भृगु-पत्र निकाल कर फल कथन, दूसरा जातक के प्रश्न पूछने पर उसको एक अंक तालिका में से एक अंक का चयन करने को कहना और फिर उसके आधार पर भविष्यवाणी करना और अंत में तीसरा जातक के हाथ की रेखाओं और जन्म कुंडली के ग्रहों की स्‍थ‌ित‌ि की गणना के आधार पर भृगु-पत्र निकाल कर भविष्वाणी करना। इस तरह से व्यक्ति के जीवन के बारे में बताया जाता है. उपरोक्त तीनों पद्धतियों में से पहली दो का अभ्यास अधिकतर भृगु शास्त्री करते ही आपको मिल जायेगे, वही तीसरी पद्धति का अभ्यास काफी कम ज्योतिषियों द्वारा किया गया है।

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भृगु दोष क्या होता है?

भृगु पद्धति को हिन्दू ज्योतिष की सबसे रहस्मय और कठिन शाखा माना जाता है। पाराशरी, जैमिनी और ताज‌िक पद्धतियों की भांति भृगु की शिक्षा प्राप्त नहीं की जा सकती। भृगु पद्धति तर्कसंगत न होकर दैवीय शक्ति में विश्वास और साधना के बल पर आधारित है। इस कारण से भृगु का ज्ञान हमेशा कुछ परिवारों तक ही सीमित रहा है।

Bhrigu Samhita Pdf

 

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