स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन PDF|  Swami Vivekananda Quotes PDF Download 

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन PDF|  Swami Vivekananda Quotes PDF Download

Swami Vivekananda Quotes: हम सभी जानते हैं कि, भारत देश में ऐसे कई महापुरुष हुए हैं, जिनके जीवन और विचार से सभी लोग आज भी प्रेरित होते हैं। उस जगह पर कुछ सीखने को मिलता है उनके विचार ऐसे हैं कि, निराश व्यक्ति भी अगर उसे पढ़ ले तो जीवन जीने का उन्हें एक नया मकसद मिल जाता है, उन्हीं महापुरुषों में से एक है श्री स्वामी विवेकानंद जी उनका जन्म सन 1963 में हुआ था और 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की स्मृति दिवस के मौके पर उनके कई अनमोल विचारों को लोग एक दूसरे के साथ शेयर करते हुए भी देखे जा सकते हैं।

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

आज हम आपके सामने उनके कुछ ऐसे ही अनमोल विचारों को लेकर आए हैं, जिन्हें पढ़कर आपको भी एक नई चेतना और जागृति मिलेगी। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। आपके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। ‘स्वामी विवेकानंद’ नाम उनको उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने दिया था।

वही अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मलेन में आपने भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया, तथा वेदांत दर्शन का प्रसार पुरे विश्व में किया। आपने समाज के सेवा कार्य के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की है।

स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारो में कहा हैं कि, जिस पल मुझे यह ज्ञात हो गया कि हर मानव के हृदय में भगवान हैं तभी से मैं अपने सामने आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती है, धूमिल हो जाती है और मैं तो आजाद हूं। अपने ज्ञानमय विचारो से सभी को प्रभावित किया। आइए जानते हैं स्वामी विवेकानंद के ऐसे अनमोल विचार, जो आपको जीवन में हौंसला देंगे।

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स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार SWAMI VIVEKANAND KE ANMOL VICHAR

1 उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।

 

2 एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकि सब कुछ भूल जाओ।

 

3 पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार लिया जाता है।

 

4 एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारो बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।

 

5 खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।

 

6 सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी वह एक सत्य ही होगा।

 

7 बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।

 

8 विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

 

9 शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है।

 

10 उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।

 

11 हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचाने अपने आप को अंदर या बाहर से सुधारकर। कर्म, पूजा, अंतर मन या जीवन दर्शन इनमें से किसी एक या सब से ऐसा किया जा सकता है और फिर अपने आपको खोल दें। यही सभी धर्मो का सारांश है। मंदिर, परंपराएं , किताबें या पढ़ाई ये सब इससे कम महत्वपूर्ण है।

 

12 एक विचार लें और इसे ही अपनी जिंदगी का एकमात्र विचार बना लें। इसी विचार के बारे में सोचे, सपना देखे और इसी विचार पर जिएं। आपके मस्तिष्क , दिमाग और रगों में यही एक विचार भर जाए। यही सफलता का रास्ता है। इसी तरह से बड़े बड़े आध्यात्मिक धर्म पुरुष बनते हैं।

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13 एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकि सब कुछ भूल जाओ।

 

14 पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार लिया जाता है।

 

15 एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारो बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।

 

16 खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।

 

17 सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी वह एक सत्य ही होगा।

 

18 बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।

 

19 विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

 

20 शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है।

 

21 जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

 

22 जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है – शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो।

 

23 विवेकानंद ने कहा था – चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।

 

24 हम जो बोते हैं वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं। है, संकुचन मृत्यु है। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है।

 

25 जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

 

26 जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है – शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो।

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27 विवेकानंद ने कहा था – चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।

 

28 हम जो बोते हैं वो काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं।

Swami Vivekananda Quotes PDF Download

उनके कुछ अनमोल विचारों (quotes) का संग्रह यहां PDF में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसे आप यहां से download कर सकते हैं।

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