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Hanuman Chalisa PDF(हनुमान चालीसा पाठ हिन्दी PDF )

हनुमान चालीसा पाठ हिन्दी PDF

Hanuman Chalisa PDF दोस्तों यदि आप श्री हनुमानजी को प्रसन्न करना चाहते हैं और उन को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ पढ़ना चाहते हैं तो आज हम आपको इस पोस्ट में हनुमान चालीसा पाठ की समग्र जानकारी के साथ-साथ आपको इसकी हिंदी पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे लिंक प्रदान कर रहे हैं। यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ना चाहते हैं, या फिर आप इसे PDF के रूप में डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर आए हैं।

श्री हनुमान चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

श्री हनुमान जी देवी देवताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और यह प्रभु श्रीराम के परम भक्त है। यदि सच्चे मन से हनुमानजी की आराधना की जाए तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa Path) का पाठ करने से भक्तों के जीवन में बल बुद्धि ऐश्वर्या और उन्नति मिलती है। साथ ही शनि ग्रह और साढ़ेसाती का प्रभाव किसी व्यक्ति विशेष पर कम करने के लिए भी हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।  हनुमान जी को कलयुग में जागृत देव के रूप में जाना जाता है और इन्हें प्रसन्न करना भी काफी आसान है, इसलिए आप इनका पाठ कर सकते है।

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हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ आप नियमित रूप से एक बार जरूर करें, लेकिन यदि आप इसे सही तरीके से करना चाहते हैं, तो इस पाठ को एक साथ 11, 100 या फिर 108 बार कर सकते हैं। शास्त्रों में यह बताया गया है, कि प्रतिदिन 100 बार पाठ करने से कई प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो कम से कम 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें, जिससे कि आपकी मनोकामनाएं जल्द से जल्द पूर्ण होती है।

हनुमान चालीसा पढने के नियम

हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए आपको सबसे पहले स्नान करना चाहिए और आपको गंदे कपड़े नहीं पहनना चाहिए।  यह साथ ही यदि आपके घर में कोई रजस्वला स्त्री है, तो उसका स्पर्श भी नहीं करें ऐसी गलतियों करने से आपको हमेशा बचना चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करते समय बैठने के लिए उन्हीं या फिर कुशा के आसन का उपयोग किया जाता है। कुशा के आसन का उपयोग पूजा में सबसे उपयुक्त आसनों में से एक माना जाता है यदि आप इन सभी नियमों का पालन करते हैं और इनका अनुसरण करते हैं तो आपको जल्द ही इसका फल भी प्राप्त होता है।

इसके साथ ही जब भी आप हनुमान चालीसा का पाठ आरम्भ करे तब, सर्वपर्थम भगवान गणेश की वन्दना करें और इसके बाद भगवान श्री राम और माता सीता को प्रणाम करें। हनुमान चालीसा के पाठ करने से पहले धूप-दीप जलाएं और हनुमान जी को पुष्प अर्पित करे और अपनी मनोकामनाओं को ध्यान में रखते हुए ही चालीसा का पाठ करें।

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श्री हनुमान चालीसा पाठ (Hanuman Chalisa) PDF Hindi 

 

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

लाय सजीवन लखन जियाए
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

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भूत पिशाच निकट नहि आवै
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

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हनुमान चालीसा लाभ –

मान्यता है कि, हनुमान चालीसा का पाठ नियमित रूप से करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि मिलती है और व्यक्ति में पराक्रम की भावना भी जागृत होती है. इसके साथ ही यह मोक्ष की प्राप्ति के लिए एक सुगम मार्ग भी दर्शाता है.

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