सुंदरकांड

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ हिंदी लिरिक्स – Sunderkand Lyrics PDF File Download

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ हिंदी लिरिक्स – Sunderkand Lyrics PDF File Download

Sunderkand Lyrics PDF: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आज के वर्तमान समय में कहीं लोग अपने अपने घरों पर सुंदरकांड का पाठ करवाते हैं और विधि विधान से इस सुंदरकांड का पाठ करके अपनी मनोकामनाएं पूर्ण भी करते हैं।

सुंदरकांड

सुंदरकांड

वैसे तो माना जाता है कि, मंगलवार का दिन भगवान को समर्पित है। इस दिन पूजा पाठ करने से कई शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आज हम आपको सुंदरकांड के बारे में बताने जा रहे हैं। यदि आप मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करते ही तो प्रभु श्रीराम के परम भक्त भगवान हनुमान की कृपा आप पर सदा बनी रहती है। कहा जाता है कि, हनुमान जैसे देता है जो हमारे भी धरती पर मौजूद है और यह आठों सिद्धियां और नौ निधियों के जाता है। यही है जो उनकी कृपा देता है वह भवसागर से तर जाता है इसमें महाबली हनुमान जल्दी प्रसन्न होते है।

सुंदरकांड का पाठ कब करें?

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस पाठ को सबसे उत्तम मंगलवार और शनिवार को दिन करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा इसे रोजाना भी किया जा सकता है यदि आप इस का पाठ करना चाहते है, इसके लिए सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक जाने की ब्रह्म मुहूर्त में पाठ करें या करना अत्यंत फलदाई माना गया है वहीं अगर आप सुंदरकांड का पाठ समूह में करते हैं, अगर बातें ही तो कभी भी करवा सकते हैं।

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सुंदरकांड का पाठ करने के नियम –        

पाठ को करते समय प्रतिमा स्थापित करने के बाद शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। बजरंगबली हनुमान जी के चरणों में 7 पीपल के पत्ते अर्पित करें। इसके साथ ही उन्हें लड्डू का भोग लगाएं। उसके बाद ही सुंदरकांड का पाठ शुरू करें।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सुंदरकांड का पाठ 11, 21, 31, 41 दिन तक कर सकते हैं। इस पाठ को करने के लिए सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। बस, इस बात का ध्यान रहे कि हनुमान जी की प्रतिमा ऐसी होनी चाहिए। जिसमें प्रभु श्री राम, माता सीता व लक्ष्मण की (Sunderkand Path Niyam) तस्वीर हो।

सुंदरकांड का पाठ घर में कब करें

सुंदरकांड रामचरितमानस का एक अध्याय है जो श्रद्धेय कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखा गया है। यह महाकाव्य रामायण का गठन करने वाले सात कांडों (वर्गों) में से एक है और यह माना जाता है कि नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करने से बुराइयों को दूर करने, मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है, और यह सुख और समृद्धि के साथ श्रेष्ठ बनती है।

इसीलिए आज कई लोग सुंदरकांड का पाठ अपने घरों में करते हैं, पर आया कई लोगों को देखा गया है कि, साल में एक बार या कोई हर महीने या फिर कोई हर मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करवाता है। यदि आप सुंदरकांड का पाठ घर में करवा रहे हैं तो, आप इसे कभी भी कर सकते हैं। इसका विधि विधान से काटकर आप अपनी हर मनोकामनाएं भगवान के समक्ष रख सकते हैं, जिस तरह से भगवान हनुमान ने श्री राम जी को सीता की खोज में मदद की उसी तरह से यह आपकी अपनी मदद करते हैं। सुंदरकांड में भगवान कहते हैं कि “निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा” इसका अर्थ है कि स्वयं की तरह भगवान के भक्तों को पसंद करते हैं जिसके पास धन और महान विचार होते हैं। इसलिए आप शुद्ध मन से अपने घर में इसका पाठ करवा सकते हैं।

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