सुंदरकांड का पाठ
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सुन्दरकाण्ड पाठ (Sunderkand Path) PDF Hindi

Sunderkand Path PDF Hindi: सुंदरकांड का पाठ आज के समय में कई लोगों द्वारा किया जाता है ऐसा माना जाता है कि, हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सुंदरकांड का पाठ सबसे अचूक उपाय सुंदरकांड का पाठ नियमित करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, सभी मनोकामनाएं की पूर्ति होती है। आपको बता दें कि, तुलसीदास कृत रामचरितमानस का पांचवा कांड सुंदरकांड होता है।

क्या सुंदरकांड का पाठ एक बार में करना चाहिए?

सुंदरकांड का पाठ

कई लोगों को मानना होता है कि, क्या सुंदरकांड का पाठ है एक बार में ही पूरा करना चाहिए फिर से रुक-रुक कर कर सकते हैं। आपको बता दें कि सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो कि, राम के भक्त हनुमान की विजय का कांड सुंदरकांड का पाठ सभी मनोकामना को पूर्ण करने वाला होता है और ना किसी की परेशानी संकट के समय इस का पाठ किया जा सकता है। हनुमान जी के सुंदरकांड का पाठ Sunderkand Path सप्ताह में एक बार अवश्य करना चाहिए वही ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह भी बताया गया है कि, विषम परिस्थितियों में सुंदरकांड का पाठ करने की सलाह दी जाती है, इसके माध्यम से ग्रह कलेश दूर होता है परिवार में खुशियां बढ़ती 40 सप्ताह तक सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में कई तरह के बदलाव भी आते हैं।

वहीं यह भी कहा गया है कि, यदि सुंदरकांड का पाठ यदि आप एक बार में करते हैं तो काफी अच्छा है और यदि आप एक बार में से फोन नहीं कर पाते हैं, तो आप इसे रुक रुक कर भी पूरा कर सकते हैं।

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सुंदरकांड करने के फायदे (Sunderkand Path Ke Fayde)

शास्त्रों के अनुसार सुंदरकांड का पाठ नियमित रूप से करने से आपके कार्य और रोग से छुटकारा मिलता है। हनुमान जी की भक्ति करने और नियमित सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में हर परेशानियां दूर होती है और सफलता प्राप्त होती है।

सुंदरकांड की शुरुआत किस दिन करना चाहिए

सुंदरकांड के पाठ की शुरुआत मंगलवार है शनिवार के दिन ही शुरू करना चाहिए, इसमें स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और साथ में सीता जी और श्री राम जी की मूर्ति की पूजा भी करनी चाहिए। हनुमान जी की पूजा फल फूल मिठाई और सिंदूर से करें सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले गणेश वंदना जरूर करें। इसके साथ ही धूप ध्यान और उसका आसन लगाकर सुंदरकांड का पाठ शुरू करना चाहिए।

सुंदरकांड का महत्व

वैसे तो सुंदरकांड का पाठ करने के कई लाभ व्यक्ति को प्राप्त होते हैं, लेकिन सुंदरकांड का सबसे बड़ा महत्व होता है कि इसके माध्यम से हनुमान जी काफी जल्दी प्रसन्न होने होते हैं और इसके माध्यम से वर्ग होती और कृपा प्रदान करने वाले माने जाते हैं। मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक तरीके से कई तरह के बदलाव आते हैं और जातक प्रतिदिन निधि सुंदरकांड का पाठ करता है तो, उसकी एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

सुंदरकांड का सार क्या है 

रामचरित्र मानस का पांचवा कांड सुंदरकांड कहलाता है। सुंदरकांड पाठ Sunderkand Path रामचरितमानस के साथ रंगों में से एक है। इसमें हनुमान जी द्वारा सीता जी की खोज और रावण के किले में जाकर राक्षसों का संहार करने का पूरा वर्णन बताया गया है। इसमें दोहे और चौपाई या है इसके साथ ही इसमें विशेष चंद भी लिखे गए संपूर्ण रामचरितमानस में श्रीराम के सूर्य और विजय की गाथा इसमें लिखी गई है, लेकिन सुंदरकांड में उनके भक्त हनुमान की गाथा और उनके बल और उनकी बुद्धि का उल्लेख यहां पर किया गया है।

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