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सम्पूर्ण बजरंग बाण PDF | बजरंग बाण पाठ – दोहा और चौपाई | Bajrang Baan PDF in Hindi

Bajrang Baan PDF in Hindi: हम सभी जानते हैं कि. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार देवी देवताओं में बजरंगबली को को उन देवताओं में से एक माना जाता है जो कि, पृथ्वी पर आज भी विराजमान है. वहीं अंजनी पुत्र वीर बजरंगबली ऐसे देवताओं में से एक है, जो अपने भक्तों के सभी कष्टों को और परेशानियों को दूर करते हैं. इसके साथ ही अभय और रोगों से भी मुक्ति दिलाते हैं.

बजरंगबाण का पाठ Bajrang Baan

यदि आप भगवान हनुमान जी को जल्द ही पसंद करने वाली चाहते हैं तो, आप इसके लिए बजरंगबाण का पाठ कर सकते हैं. कई लोग हनुमान चालीसा कभी पाठ करते हैं. इसके साथ ही आपको बजरंग बाण का पाठ भी करना चाहिए. भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए और अपनी सभी मनोकामना की पूर्ति के लिए इनकी पूजा और उपासना करते हैं, ताकि सभी इच्छाओं की पूर्ति प्राप्त की जा सकती है. हनुमान चालीसा का पाठ करने की सांसद बजरंग बाण का पाठ करना शुभ माना जाता है. बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की आराधना करने का आशीर्वाद पाने का सबसे अच्छी उपाय माना गया है.

बजरंग बाण ( Bajrang Baan ) से कुंडली दोष दूर होना

शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है कि, जो व्यक्ति नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करता है उसके जीवन में ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं. साथ ही उसके कुंडली में यदि किसी तरह का दोष है तो वह भी दूर होता है. किसी को विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर हो जाती है. गंभीर बीमारियां होने की दशा में इससे राहत मिलती है, व्यक्ति को अपने कार्य और व्यापार में सफलता प्राप्त करने के लिए भी बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए. इसके साथ ही बजरंग बाण का पाठ करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और वास्तु दोष खत्म हो जाते हैं.

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बजरंग बाण का पाठ करने की विधि

जिस तरह से आप हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उसी तरह से बजरंग बाण (Bajrang Baan Path) का पाठ भी किया जा सकता है. इसका पाठ करने की सबसे अच्छी विधि यही है कि, सूर्योदय से पहले स्नान ध्यान करके हनुमान जी के प्रिय रंग लाल या नारंगी वस्त्र पहनकर हनुमान जी की तस्वीर के समक्ष घी का दीपक जलाएं और बजरंग बाण का पाठ कर उनके सामने करें. इसके साथ ही आप बैठने के लिए कुछ के आसन का उपयोग कर सकते हैं. यह पाठ शुद्ध उच्चारण के साथ और एक बार में ही पूरा करने का विधान है.

दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

बजरंग बाण चौपाई

जय हनुमंत संत हितकार, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी

जन के काज बिलंब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै

जैसे कूदि सिंधु महिपारा, सुरसा बदन पैठि बिस्तारा

आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुरलोका

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा

अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा

लाह समान लंक जरि गई, जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई

अब बिलंब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी

जय-जय लखन प्रान के दाता, आतुर ह्वै दुख करहु निपाता

जय हनुमान जयति बल-सागर, सुर-समूह-समरथ भट-नागर

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारु बज्र की कीले

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा

जय अंजनि कुमार बलवंता, शंकरसुवन बीर हनुमंता

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बदन कराल काल-कुल-घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक

भूत, प्रेत, पिसाच निसाच, र अगिन बेताल काल मारी मर

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै, राम दूत धरु मारु धाइ कै

जय-जय-जय हनुमंत अगाधा, दुख पावत जन केहि अपराधा

पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं

जनकसुता हरि दास कहावौ, ताकी सपथ बिलंब न लावौ

जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुख नासा

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं, यहि औसर अब केहि गोहरावौं

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई, पायँ परौं, कर जोरि मनाई

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल

अपने जन को तुरत उबारौ, सुमिरत होय आनंद हमारौ

यह बजरंग-बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै

पाठ करै बजरंग-बाण की, हनुमत रक्षा करै प्रान की

यह बजरंग बाण जो जापैं, तासों भूत-प्रेत सब कापैं

धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहिं रहै कलेसा

ताके तन नहिं रहै कलेसा

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान

बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान

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